69000 कटऑफ फैसले के खिलाफ सरकार दे सकती अदालत में चुनौती, फैसला आने का इंतजार का

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69000 कटऑफ केस ऑर्डर के संबंध में अतिमहत्वपूर्ण सूचना

1) 69000 कटऑफ केस ऑर्डर का ऑपरेटिव पार्ट परसो यानी 29.03.2019 को लखनऊ कोर्ट 23 में सुनाया जाएगा।
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2) पक्ष में आता है तो भी अधिकारियों से मिलकर प्रक्रिया प्रारंभ करवाने के लिए आपको घरों से निकलना होगा और डीबी में बचाना होगा क्योंकि कटऑफ विरोधी इसे ऊपर कोर्ट में अवश्य लेकर जाएंगे। बिना सीनियर के कुछ नहीं होगा।
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3) विपक्ष में आता है तो प्रक्रिया को आगे बढ़ने से रूकवाना होगा और डीबी में अपील फ़ाइल करनी होगी। इसलिए एक्टिव मोड में आ जाएं।
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4) बाकी आर्डर में क्या रहेगा यह कोई नहीं बता सकता राजेश चौहान जी का रूख अधिकारियों की मनमानी के विरुद्ध रहा है वहीं दूसरी ओर लीगल टीम ने भी यूनिवर्स में उपलब्ध बचाने के लिए जो आर्डर थे सब लगाए हैं। आपको क्या लगता है?
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सरकार को लगा करारा झटका PRIMARY KA MASTER

12460, 29334 गणित विज्ञान, 32022 अनुदेशक भर्ती और 4000 उर्दू शिक्षक भर्ती पर से रोक हटी, सरकार को लगा करारा झटका, कोर्ट ने सरकार से दो माह के भीतर प्रकिया पूर्ण करने का दिया आदेश


UPPSC: पीसीएस-जे मेंस का इस हफ्ते आ सकता है रिजल्ट, मई तक अंतिम चयन के कई रिजल्ट होंगे घोषित

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कल तक तय हो जायेगें बीएड के परीक्षा केंद्र, प्रवेश परीक्षा तिथि में फिर होगा परिवर्तन, कल बन सकती है सहमति

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लोक सभा चुनाव के चलते बदलीं महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तिथियाँ

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PGT शिक्षक भर्ती में बड़ा बदलाव, 50 फीसदी पदों पर होगी सीधी भर्ती

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एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती समेत 17000 से अधिक पदों पर भर्ती का इंतजार

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शिक्षामित्रों को नहीं मिला मानदेय, रोष: बजट उपलब्ध होने के बाबजूद मानदेय न मिलने से फीकी हुई होली

शिक्षामित्रों को नहीं मिला मानदेय, रोष: बजट उपलब्ध होने के बाबजूद मानदेय न मिलने से फीकी हुई होली
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डीएलएड - टीईटी न करने वाले शिक्षामित्रों की नौकरी खतरे में

Uttarakhand: डीएलएड - टीईटी न करने वाले शिक्षामित्रों की नौकरी खतरे में, अर्हता पूरी न करने वाले शिक्षामित्रों के पदों को रिक्त मानते हुए भर्ती प्रक्रिया चलाने के निर्देश



चार साल की मियाद पूरी कर लेने के बाद भी डीएलएड-टीईटी न कर पाने वाले शिक्षा मित्रों की नौकरी खतरे में है। शिक्षा निदेशालय से जारी आदेश में प्राथमिक शिक्षा के जिला शिक्षा अधिकारियों को सहायक अध्यापक प्राथमिक की अर्हता पूरी न करने वाले शिक्षा मित्रों के पदों को रिक्त मानते हुए उन पर भर्ती प्रक्रिया कराने को कहा गया है। हालांकि यह भर्ती प्रक्रिया आदर्श आचार संहिता हटने के बाद ही होगी। यदि ऐसा हुआ तो राज्य के हजारों शिक्षा मित्रों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है।

शिक्षा सचिव आर.मीनाक्षी सुंदरम ने प्रारंभिक शिक्षा निदेशक को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) नई दिल्ली की अधिसूचना में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए अर्हताओं और सेवा से संबंधित मूल अधिनियम में जोड़े गए नये उपबंध के अनुसार, 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या पदासीन प्रत्येक शिक्षक को निर्धारित शैक्षिक और प्रशिक्षण अर्हता पूर्ण करने के लिए 4 साल का समय दिया है। निर्धारित अहर्ताएं (दो साल का डीएलएड प्रशिक्षण और टीईटी क्वालिफाई) पूरी करने के लिए शिक्षा मित्रों के पास 31 मार्च 2019 तक का समय है। यदि इस तिथि के बाद भी शिक्षा मित्र निर्धारित अर्हताएं पूरी नहीं कर पाते हैं, तो एनसीटीई के निर्देशों के क्रम में उन पर आवश्यक कार्रवाई की जाए।

इधर, प्रारंभिक शिक्षा निदेशक आरके कुंवर की ओर से इस संबंध में प्राथमिक शिक्षा के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए इस तिथि तक डीएलएड/टीईटी उत्तीर्ण न कर सकने वाले शिक्षा मित्रों के पदों को रिक्त मानते हुए वर्तमान में चलाई जा रही भर्ती प्रक्रिया में उन पदों को शामिल करने को कहा गया है। बता दें कि, वर्ष 2016-17 में राज्य में ऐसे शिक्षा मित्रों की संख्या करीब दो हजार थी, जो डीएलएड/टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके थे। बहरहाल, हाल ही में जारी हुए यूटीईटी परीक्षा परिणामों के आधार पर अर्हता पूरी न करने वाले शिक्षा मित्रों का ब्योरा जुटाया जा रहा है।

वीएस रावत (अपर निदेशक, प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड) ने कहा- शिक्षा मित्रों को निर्धारित अर्हता पूर्ण करने के लिए चार साल का समय दिया गया था, जो आने वाली 31 मार्च को पूरा हो रहा है। उच्च स्तर से प्राप्त आदेशों के क्रम में चुनाव आदर्श आचार संहिता हटने के बाद अर्हता पूर्ण न करने वाले शिक्षा मित्रों पर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भी निर्देशित कर दिया गया है।

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69000 कट-ऑफ मुद्दा हाइकोर्ट प्रकरण: लखनऊ लीगल टीम की कलम से

आप सभी संघर्षरत कट-ऑफ समर्थक एव विपक्ष को मेरा नमस्कार। मुद्दा कट-ऑफ एक ज्वलंत प्रकरण *07 जनवरी-2019* से *_4 लाख 10 हजार_* अभ्यर्थियो हेतु बना हुआ है। 1,000 प्रकार के दावे *कट-ऑफ समर्थक एव विरोधी* द्वारा किये जा रहे। अततः एक लंबे सुनवाई के बाद _निर्णय उच्च न्यायलय की लखनऊ खंडपीठ में माननीय जस्टिस राजेश चौहान जी द्वारा 22-फरवरी को सुरक्षित कर लिया गया है।_ *अटकलों का बाजार गर्म है..पक्ष विपक्ष के द्वारा सोशल मीडिया पे।* यह पोस्ट सिर्फ आज तक हुए कोर्ट में बहस पे आधारित है पक्ष या विपक्ष का इससे कोई विशेष सम्बन्ध नही है। हो सकता है 60%-65% समर्थक होने के नाते आपको थोड़ी बहुत कट-ऑफ समर्थन की झलक दिख जाए।
*🎙 कट-ऑफ 60%-65% गलत है। या 7 जनवरी के GO अवैध है(याचिकाकर्ता के अनुसार)*
_सरकार ने 100% मनमानी एव गलती की है।_
सबसे पहली बात ये की GO गलत हो सकता है 1 मिनट के लिए...लेकिन इसका यह मतलब नही की *90 एव 97 अंक* पाने वाला बाहर रहे एव 10,20,30,40,50,60,70..... अंक पाने वाला शिक्षक बन जाये .. *गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा हेतु गुणवत्तापरक (उच्चतम कट-ऑफ वाले) शिक्षक चाहिए आप खुद तय करे पक्ष या विपक्ष किसका चयन होना चाहिए।* इसके लिए *मध्य प्रदेश का हाइकोर्ट* का आदेश यह कहता है कि..गुणवत्त हेतु सरकार अपने तय मापदंडो में बदलाव कर सकती है जिसे *_"खेल के बीच मे खेल का नियम नही बदला जा सकता से जोड़ के नही देखा जा सकता।"_* बाकी आप लोग पूर्ण रूप से स्वतंत है अटकले लगाने एव न लगाने हेतु... 💯%सरकार ने गलती की है बाद में GO जारी कर के।

*🎙 सबसे बड़ा सवाल खेल के बीच मे खेल के नियम नही बदले जा सकते फिर यह 7 जनवरी के GO 100% अवैध है।*
सिर्फ भावनाओ एव मानवीय सवेदनाओ पे न्यायालय के निर्णय नही हुआ करते.. याचीकर्ता ने *मंजुश्री ऑर्डर* को ढाल बनाते हुए केस कर दिए... न्यायालय अभी *7 जनवरी के GO पे न्यायालय कोई फैसला दे उससे पहले किसी "विधि चाणक्य" 🤪 ने उसे अवैध घोषित कर दिया।* पक्ष ने भी *धोनी* की तरह दो कदम आगे बढ़ते हुए मंजुश्री ऑर्डर की तोड़ *तेज प्रकाश पाठक एव सुभाष चंद्र मारवाह, मध्यप्रदेश सरकार, अन्य आदेश* की बौछार कर दिया... पलड़ा किसका भारी है खुद निर्णय ले।
*"खेल के बीच मे खेल के नियम नही बदले जा सकते"~ तेज प्रकाश पाठक केस में सर्वोच्च न्यायालय के 5 जजों की संवैधानिक पीठ को निर्णीत करना है ।-- ऐसे में संविधान के अनु 32 के अंतर्गत निचली अदालत कोई ऐसा मुद्दे पे फैसला नही दे सकता जो उसके ऊपरी  न्यायलय में पेंडिंग हो सिर्फ अंतिम याचिका के अधीन कर सकते है।* यहाँ फैसला सिर्फ दो मुद्दों पे आएगा या तो *शून्य या 60%-65%* सरकार के जीतने की संभावना 68-70% है।

*🎙 सुरक्षित आदेश कब तक आ सकता है????*
न्यायालय एव न्यायाधीश महोदय पे किसी का बस नही चलता यह एक स्वतंत्र प्रक्रिया है। मसलन इस पर टिपड़ी सिर्फ और सिर्फ बचकाना हरकत है।
चुनाव , 4 लाख बच्चो का भविष्य, एव प्राथमिक में अध्ययनरत बच्चो के भविष्य को देखते हुए आशा है जल्द से जल्द देंगे.. *बुद्धवार को कुछ अच्छा सुनने को मिल सकता है।* आगे बजरंगबली जाने क्या होगा।

_® विशेष:- 60%-65% जीतता है तो पक्षकार वकील के अलावा *श्री एच एन सिंह जी* विपक्ष के अधिवक्ता का बहुत बड़ा करीब 60% योगदान मानना चाहिए।_

*🎙✍विशेष अपील सर्वेश प्रताप सिंह - लीगल टीम लखनऊ को 60%65% वाले डबल बेच तक मजबूती से पैरवी के लिए आर्थिक मानसिक शारीरिक रूप से बल प्रदान करे। विपक्ष अपने नेतृत्वकर्ता को जो भी हो कई है 60%-65% का बस सर्वेश है।*

*_धन्यवाद🙏_*

राज्य कर्मियों का यात्रा भत्ता दोगुना, प्रदेश के 18 लाख से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

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UGC-NET: यूजीसी नेट परीक्षा के लिए 30 मार्च तक करें ऑनलाइन आवेदन,

UGC-NET: यूजीसी नेट परीक्षा के लिए 30 मार्च तक करें ऑनलाइन आवेदन, 20 से 28 जून के बीच दो पालियों में होगी ऑनलाइन परीक्षा

असिस्टेंट प्रोफ़ेसर भर्ती के लिए जल्द शुरू होगी काउन्सलिंग प्रक्रिया

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मुफ्त दाखिले के लिए पहले दिन सात हजार आवेदन, आरटीई के दायरे में शामिल निजी स्कूलों की सूची जारी

लखनऊ :आरटीई के दायरे में शामिल निजी स्कूलों की सूची जारी हो गई है। ऐसे में शहर के एक हजार से अधिक विद्यालयों में मुफ्त दाखिला का मौका है। दुर्बल आय वर्ग के अभिभावक तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के नर्सरी व कक्षा एक में एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत शुक्रवार से आवेदन शुरू हो गए हैं। विभाग की वेबसाइट पर प्रदेश भर से शाम तक सात हजार बच्चों के फॉर्म अपलोड किए गए। वहीं राजधानी के अभिभावकों के पास भी बच्चों को मुफ्त पढ़ाने का मौका है। सरकार ने दुर्बल आय वर्ग में शामिल बच्चों को निजी स्कूल में दाखिला का आदेश दे दिया है। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग ने जिलावार स्कूलों की मैपिंग व उनमें आरक्षित सीटों का ब्योरा जारी कर दिया है। इसमें लखनऊ के करीब दो हजार स्कूलों में दाखिला होंगे। वहीं 1359 विद्यालय शहरी इलाके के हैं। शेष ग्रामीण क्षेत्र के स्कूल हैं। मैपिंग में शामिल विद्यालयों में 18 हजार, 148 सीटें आरक्षित की गई हैं। सीएमएस, डीपीएस, आरएलबी में पढ़ाई का विकल्प : आरटीई के तहत सीएमएस की विभिन्न ब्रांचों में भी मुफ्त दाखिला ले सकते हैं। डीपीएस, आरएलबी, एलपीएस की ब्रांचों में भी 10-10 सीट रिजर्व की गई हैं। मिलेनियम, पॉयनियर, सेंट जेम्स, जयपुरिया, एसकेडी, सिटी इंटरनेशल स्कूल, सेंट्रल एकेडमी में भी दस सीटों का प्रावधान है।

’>>देश में आरटीई की सीटें 21 लाख

’>>यूपी में आरटीई की सीटें 6 लाख

’>>इसमें तीन लाख शहर व तीन लाख ग्रामीण स्कूलों की सीटें।

SSC: CHSL सीएचएसएल भर्ती के आवेदन 5 से शुरू, एसएससी की ओर से 5000 से अधिक पदों के लिए होगा ऑनलाइन आवेदन

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यूजीसी नेट परीक्षा के लिए आवेदन आज से शुरू

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दरोगा भर्ती 2016 का परिणाम घोषित, खाली रह गए पद

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68500 पुनर्मूल्यांकन के रिजल्ट के बाद नियुक्ति सिर्फ 4700 की ही

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68500 शिक्षक भर्ती में अभी और होंगे फेल-पास, सूची हो रही तैयार

प्रयागराज : शिक्षक भर्ती की लिखित परीक्षा में कॉपी पर उम्दा अंकों से उत्तीर्ण भले ही महीनों बाद नियुक्ति पा सके हैं लेकिन, कॉपी पर फेल मिलने वाले तमाम अभ्यर्थी स्कूलों में अभी पढ़ा रहे हैं। उनमें से कुछ पुनमरूल्यांकन में उत्तीर्ण भी हो गए हैं। इन अभ्यर्थियों की सूची तैयार हो रही है, जिस पर शासन को अंतिम निर्णय लेना है।
68500 शिक्षक भर्ती का परिणाम 13 अगस्त को आने के बाद मूल्यांकन पर गंभीर आरोप लगे थे। बवाल बढ़ने पर शासन ने प्रकरण की जांच उच्च स्तरीय समिति को सौंपी थी। समिति ने जांच में पाया कि 53 अभ्यर्थी सहायक अध्यापक पद पर चयनित हो चुके हैं लेकिन, कॉपी पर अंक तय कटऑफ से काफी कम हैं। खास बात यह है कि ये अभ्यर्थी उन 23 अभ्यर्थियों से अलग हैं, जो कॉपी पर अनुत्तीर्ण होते हुए चयनित हो गए और उन्हें जिला भी आवंटित कर दिया गया था। हालांकि बेसिक शिक्षा परिषद की तत्परता से वे नियुक्त नहीं हो पाए। शासन ने निर्देश दिया कि चयनित हो चुके और कॉपी पर अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों की कॉपी का भी दोबारा मूल्यांकन कराया जाए। उनकी कॉपी पुनमरूल्यांकन में एससीईआरटी में जांची जा चुकी हैं और रिपोर्ट परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को भेज दी गई।

69000 और 68500 शिक्षक भर्ती कट ऑफ में आगे अब क्या?

1) 68500 : 30/33 को अटल नहीं होने दिया। सभी केस से जुड़े लोगों का और उन्हें सहयोग करने वालों का धन्यवाद।
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2) याचिका को disposed as infructuous करा लिया गया। अब 68500 में 30/33 कोई नहीं करवा सकता।
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3) जिस लड़ाई को एक विशेष स्ट्रेटेजी के तहत शुरू किया गया उस को अंजाम तक भी पहुंचा दिया गया।
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4) नाम चाहे जिस का हो हम प्रतिभा के साथ और शोषितों के साथ स्पेशली मिडल क्लास जनरल वर्ग के साथ हमेशा खड़े रहेंगे जिनके साथ रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन होता है।
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5) 68500 में 40/45 लगवाना और 69000 में 60/65 बचाना दोनों एक सिक्के के दो पहलू की तरह थे।
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6) क्यों यह सब जानते हैं, जब हम 69000 भर्ती में उन्ही trump कार्ड को use करने लगे तो 68500 में चयनित डर रहे थे कि कहीं 68500 में 30/33 न हो जाये।
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7) अब डर समाप्त आप भी मन, वचन और कर्म से 69000 में 60/65 कटऑफ का साथ दीजिये। आप अपने साथ 110 अंक वाले के स्थान पर 40 अंक वाले sm को नौकरी करते देखना चाहते हों तो अलग बात है।

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PS: 60/65 बचाने में ब्रह्माण में उपलब्ध सभी ग्राउंड्स लगा दिए अब निर्णय जज साहब के विस्डम और डिस्क्रेशन पर है। हमारे विरुद्ध आया तो भर्ती आगे नहीं बढ़ने दी जाएगी।

अब प्रदेश में बदलेगी संस्कृत शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया

प्रदेश में संस्कृत के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले महाविद्यालयों के शिक्षकों की चयन प्रक्रिया बदलने की तैयारी में शासन जुटा है। शासन स्तर पर सहमति बनी है कि इन संस्कृत महाविद्यालयों के शिक्षकों का चयन उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग, उप्र के जरिये कराया जाए।


सूबे में संस्कृत के स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित करने वाले महाविद्यालय वाराणसी के संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं। प्रदेश में ऐसे महाविद्यालयों की संख्या लगभग 550 है। अभी इन महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति प्रबंध तंत्र करता है। महाविद्यालयों के प्रबंधतंत्र शिक्षकों के चयन का प्रस्ताव संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को भेजते हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति की ओर से प्रस्ताव अनुमोदित होने पर प्रबंधतंत्र शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर देते हैं। शिक्षकों के चयन की इस व्यवस्था को लेकर शासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शिक्षकों के चयन में भ्रष्टाचार के आरोप भी लग रहे थे। लिहाजा शासन ने पिछले साल अक्टूबर में संस्कृत महाविद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी। इसे लेकर संस्कृत महाविद्यालय ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने सरकार से शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया तय करने के लिए कहा था। इस सिलसिले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बैठक हो चुकी है। बैठक में सहमति बनी है कि जैसे उच्च शिक्षा विभाग से अनुदान पाने वाले अशासकीय सहायताप्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों का चयन उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के माध्यम से किया जाता है, वैसे ही संस्कृत के स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्स संचालित करने वाले महाविद्यालयों के शिक्षकों का चयन भी इसी आयोग के जरिये कराया जाए। इसके लिए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग अधिनियम, 1980 में संशोधन करना होगा।